शिक्षाप्रद हिंदी कहानियां - Best Hindi Moral Stories





1. दो दोस्तों की समझदारी

एक गांव में दो दोस्त थे। दोनो ने गांव से शहर जाकर पैसे कमाने का मन बनाया और शहर की तरफ निकल पड़े। रास्ते  में पहले दोस्त ने देखा कुछ बेर के पेड़ है जिनमें अच्छे बेर लगे थे। उसे लगा की यहां कही इनका कोई मालिक नहीं है शायद कोई ध्यान नहीं देता तभी उसे यह खयाल आया की क्यों न इन्हे शहर ले जाकर बेच दिया जाए। उसने अपने दोस्त से कहा तो उसे यह सुझाव बहुत पसंद आया। उन्होंने देखा की यह बहुत खास किस्म के बेर थे और इनके अच्छे दाम मिल जायेंगे। पहला दोस्त बेरे तोड़ने लगा और कुछ देर में इकठ्ठा बेर देखे तो कुछ बेर अच्छे बड़ी आकार के थे और काफी मीठे थे और छोटे बेर थोड़े खट्टे मीठे थे। दूसरे दोस्त ने सोचा की बड़े बेर मीठे होने की वजह से अच्छी कीमत पर बिकेंगे चाहे थोड़ी ज्यादा मेहनत करनी पड़े पर वो बड़े बेर ही तोड़ेगा। पहले दोस्त ने यह सब नहीं सोचा उसे लगा जितना हो सके और वो उठा सके उतने बेर उसे तोड़ ही लेने चाहिए। बहुत घंटे बीत गए, दोनो ने बहुत मेहनत से बेर जमा किए थे। पहले दोस्त ने इतने बेर तोड़ लिए थे की उसे उठाना मुश्किल था जो कम से कम 20 से 25 किलो थे। उसने न आव देखा था ना ताव बस तोड़ने में लग पड़ा था, दूसरी तरफ दूसरे दोस्त ने चुन चुन कर बड़े बेर तोड़े थे जिस के लिए उसे बहुत वक्त लगा था फिर भी उसने लगभग 5 किलो जितने बेर तोड़ ही लिए थे, फिर दोनो शहर की बड़ी मंडी में पहुंच गए। उनके बेर अच्छी प्रजाति के थे इस लिए जल्दी बिक गए और जैसे दूसरे दोस्त ने सोचा मीठे बेर अच्छे दाम पर बीके जो छोटे बेर से डेढ़ गुना ज्यादा थे पर उसे वजन के हिसाब से बस 1000 रुपए ही मिले। जबकि पहले दोस्त के बेर चाहे छोटे बड़े थे पर वजन में दूसरे दोस्त के बेर से 5 गुना ज्यादा थे उसे थोड़ी सी कम कीमत मिली पर उसके सारे बेर 4000 में बिके। दूसरे दोस्त को अपनी गलती देर से समझ में आई। 
  इस कहानी का मतलब यह था कि जीवन में सिर्फ बड़े मौके का चुनाव नही करना चाहिए, चाहे मौके बड़े हो या छोटे हो सभी आपको आपकी मंजिल तक पहुंचाते है। आपको कोई मौका छोड़ना नहीं चाहिए। अगर दूसरे दोस्त ने सभी बेर लिए होते तो वह भी ज्यादा पैसे कमा पाता। 

2.  बेशकीमती बकरी और चतुर व्यक्ति

  एक आदमी के पास चार बकरियां थी। उसे शाम होने से पहले उन्हें बेचना था। वह पास के बाजार में चला गया। वहां जाकर उसने देखा कि बहुत से लोग अपनी बकरियां बेच रहे थे जिससे  उसे लगा वह जल्दी अपनी बकरियां नहीं बेच पायेगा इसलिए उसने एक तरकीब लगाई, उसने चिल्लाना शुरू कर दिया और ऊंचे दाम पर बकरिया बेचने लगा। वह चिल्लाने लगा तीन बकरी पर एक बेशकीमती बकरी मुफ्त, तीन बकरियों पर एक बेशकीमती बकरी मुफ्त। वह बाकी लोगों से ज्यादा दाम लगा रहा था फिर भी उसके पास लोगों की भीड़ जमा हो गई क्योंकि वह तीन बकरियों पर एक बकरी मुफ्त दे रहा था वह भी बेशकीमती जो थोड़ी रंग में सुनहरी थी! 
  एक आदमी ने उससे पूछा अरे भाई तुम यह बकरी मुफ्त में क्यों दे रहे हो? तब उस बकरी बेचने वाले ने कहा कि यह बकरी एक बेशकीमती बकरी है और मुझे इसकी कीमत नहीं पता इसलिए बाकी तीन बकरियों के साथ इसे दे रहा हूं। लोगों ने पूछा ऐसा क्या खास है इस बकरी में तो बकरी बेचने वाले आदमी ने कहा मुझे नहीं पता! मुझे तो यह बकरी एक सौदागर ने बेची थी और उसने कहा था कि उसे इसकी कीमत का अंदाजा नहीं है क्योंकि यह एक खास सुनहरी बकरी है। इसलिए उसने भी मुझे तीन बकरी के साथ दी थी अब इसका पता तो इसके मालिक को ही चलेगा की इस बकरी में क्या खास है। लोगों में उत्सुकता बढ़ी। बहुत लोगो ने सोचा अगर इस बकरी में कोई खास बात ना भी हुई तो भी यह तो मुफ्त में मिल रही है ना इसलिए यह सौदा बुरा नहीं है। उसकी चारों बकरिया जो तंदुरस्त भी थी तो जल्दी ही सब उसके लिए बोली लगाने लगे और वह ऊंचे दाम पर बिक गई।
  इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है की सही चतुरता से व्यक्ति अपना उद्देश्य जल्दी पा सकता है।